February 11, 2026

श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने कहा, “सेवाधर्म ही सबसे बड़ा धर्म है, गुरु ही अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले हैं

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श्रीमहंत देवेंद्र दास जी महाराज ने कहा, “सेवाधर्म ही सबसे बड़ा धर्म है, गुरु ही अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले हैं

 

दरबार श्री गुरु राम राय जी के पूजनीय श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज जी का 26वां प्रकटोत्सव 10 फरवरी को श्रद्धा, भक्ति और सेवा भाव के साथ अत्यंत गरिमामय वातावरण में मनाया गया। पूरा श्री दरबार साहिब परिसर आध्यात्मिक उल्लास, गुरु सिमरन और भक्तिमय माहौल से सराबोर रहा।
प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फोन पर महाराज जी को प्रकटोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत स्वयं श्री दरबार साहिब पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके साथ ही जनप्रतिनिधियों, गणमान्य व्यक्तियों, शिक्षाविदों, चिकित्सकों, समाजसेवियों तथा आम श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर श्री महाराज जी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं अर्पित कीं। बधाई देने का क्रम दिनभर श्रद्धा और उत्साह के साथ चलता रहा।
इस अवसर पर श्री महाराज जी ने कहा, “सेवाधर्म ही सबसे बड़ा धर्म है। गुरु ही अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले हैं।” उन्होंने समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं पहुंचाने के अपने संकल्प को दोहराया।
प्रकटोत्सव के उपलक्ष्य में श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल द्वारा आयोजित विशाल निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर हजारों जरूरतमंदों के लिए वरदान साबित हुआ। कुल 5304 मरीजों ने निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। विशेष रूप से 2000 से अधिक मरीजों की एमआरआई, सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे एवं विभिन्न लैब जांचें पूर्णतः मुफ्त की गईं। एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी महंगी प्रक्रियाएं भी बिना किसी शुल्क के संपन्न कराई गईं। परामर्श के बाद मरीजों को निःशुल्क दवाइयां वितरित की गईं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली।
गरीब और असहाय मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए इसे अपने लिए “संजीवनी” बताया। कई मरीज दूरदराज क्षेत्रों से पहुंचे और सेवा भाव से मिली इस चिकित्सा सहायता को जीवनदायी बताया।
इसके अतिरिक्त स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में 65 यूनिट रक्तदान कर मानवता का संदेश दिया गया।
आस्था और सेवा के इस पावन अवसर ने यह संदेश दिया कि जब अध्यात्म और मानव सेवा एक साथ चलें, तो समाज में करुणा, विश्वास और आशा की नई रोशनी फैलती है। श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज का प्रकटोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरक उदाहरण बन गया

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