June 4, 2026

उत्तराखंड के कठिन रास्ते नहीं, आसान राजनीति पसंद है कांग्रेस को?

0

 

उत्तराखंड के कठिन रास्ते नहीं, आसान राजनीति पसंद है कांग्रेस को?

 

 

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का प्रस्तावित उत्तराखंड दौरा शुरू होने से पहले ही समाप्त हो गया। अल्मोड़ा में जनता को संबोधित करने और पौड़ी में पूर्व सैनिकों से संवाद करने का कार्यक्रम था, लेकिन पंतनगर पहुंचने के बाद मौसम खराब होने की सूचना मिली और राहुल गांधी वापस दिल्ली लौट गए। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या कांग्रेस नेतृत्व का उत्तराखंड से रिश्ता केवल चुनावी मंचों तक सीमित है?

उत्तराखंड की जनता भली-भांति जानती है कि यह कोई मैदानी प्रदेश नहीं है। यहां मौसम कभी भी बदल सकता है, रास्ते कठिन हो सकते हैं और चुनौतियां अचानक सामने आ सकती हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या मौसम खराब होने के बाद सड़क मार्ग से अल्मोड़ा पहुंचने का प्रयास नहीं किया जा सकता था? क्या कुछ घंटे इंतजार नहीं किया जा सकता था? क्या हजारों लोगों के इंतजार की कोई कीमत नहीं थी?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जनता नेताओं से केवल भाषण नहीं, बल्कि प्रतिबद्धता भी देखती है। यदि कोई नेता थोड़ी सी चुनौती आते ही कार्यक्रम छोड़कर लौट जाए तो स्वाभाविक रूप से उसके समर्पण पर सवाल उठते हैं।

इसके विपरीत मुख्यमंत्री धामी के कई ऐसे उदाहरण हैं जब उन्होंने विपरीत मौसम, आपदा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सड़क मार्ग से दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर जनता का हाल जाना। चाहे सीमांत गांव हों, आपदा प्रभावित क्षेत्र हों या चारधाम यात्रा के दौरान चुनौतीपूर्ण हालात—धामी लगातार मैदान में दिखाई दिए हैं।

भाजपा का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री धामी का उत्तराखंड से जुड़ाव केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक है। केदारखंड और मानसखंड परियोजनाओं से लेकर सड़क, रेल, रोपवे, हवाई संपर्क, सैन्य सम्मान और सीमांत विकास तक अनेक योजनाएं इस बात का प्रमाण मानी जाती हैं कि उत्तराखंड भाजपा की प्राथमिकताओं में शामिल है।

वहीं कांग्रेस पर आरोप लगते रहे हैं कि वह चुनाव के समय उत्तराखंड को याद करती है, लेकिन बाकी समय प्रदेश के मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति की भीड़ में कहीं खो जाते हैं। राहुल गांधी का अल्मोड़ा पहुंचे बिना लौट जाना इन आरोपों को और बल देता दिखाई दे रहा है।

प्रदेश में अब चर्चा इस बात की है कि उत्तराखंड भाजपा के लिए आस्था, विकास और जनसेवा का विषय है, जबकि कांग्रेस के लिए केवल एक राजनीतिक पड़ाव। जनता के मन में यह प्रश्न और गहरा हो रहा है कि जो नेता मौसम की पहली चुनौती में ही वापस लौट जाए, वह उत्तराखंड की कठिन भौगोलिक और सामाजिक चुनौतियों को कितनी गंभीरता से समझ पाएगा?

देवभूमि की जनता केवल भाषण नहीं, समर्पण भी देखती है। और राजनीति में अंततः वही नेता/ और राजनीतिक पार्टी जनता के दिल में जगह बनाती है जो कठिन समय में उनके साथ खड़ा दिखाई देता है, न कि वह जो चुनौती आते ही वापस लौट जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed